पत्रकार सुरक्षा के लिए ठोस कानून जरूरी : चैतन्य मिश्रा

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जबलपुर पत्रकार अधिवेशन में अनूपपुर का प्रभावी प्रतिनिधित्व, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

अधिमान्यता, स्वास्थ्य बीमा, श्रद्धा निधि, आवास और यात्रा रियायत सहित कई मांगें उठीं

अनूपपुर। राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के तत्वावधान में रविवार को जबलपुर के विजयनगर स्थित कचनार क्लब में आयोजित पत्रकार अधिवेशन में पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रदेशभर से पहुंचे पत्रकारों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर मंथन किया तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह, जबलपुर लोकसभा सांसद आशीष दुबे, जबलपुर उत्तर विधानसभा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे तथा राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के संरक्षक एवं मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया सहित उपस्थित अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रेषित किया।

राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजन।                                                       अधिवेशन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के राष्ट्रीय संयोजक नलिनकांत बाजपेयी, संरक्षक गंगा पाठक, राष्ट्रीय अध्यक्ष परमानंद तिवारी, सचिव देवशंकर अवस्थी, प्रदेश अध्यक्ष राजेश दुबे, प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला, महासचिव विलोक पाठक सहित परिषद के विभिन्न पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन के दौरान पत्रकार हितों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश स्तरीय मंच पर मजबूती से उठाया गया।

अनूपपुर जिले का प्रभावी प्रतिनिधित्व।              अधिवेशन में अनूपपुर जिले का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं संभागीय प्रभारी वरिष्ठ पत्रकार राजेश शुक्ला तथा संभागीय अध्यक्ष चैतन्य मिश्रा ने किया। इस दौरान चैतन्य मिश्रा ने मंच से पत्रकारों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया।

ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती।         अपने उद्बोधन में चैतन्य मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार जनहित के मुद्दों को उठाते हैं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनसमस्याओं को सामने लाने के दौरान उन्हें कई बार दबाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए शासन को ठोस और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसलिए उनके अधिकारों और सुरक्षा को लेकर सरकार को गंभीरता से निर्णय लेने की आवश्यकता है। पत्रकारों को केवल अधिमान्यता तक सीमित न रखते हुए स्वास्थ्य, आवास, यात्रा, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाना चाहिए।चैतन्य मिश्रा द्वारा उठाए गए पत्रकार सुरक्षा एवं सुविधाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रांतीय सम्मेलन के सार-संक्षेप में भी शामिल किया गया।

20 वर्ष की जगह 10 वर्ष अनुभव की मांग।           परिषद द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीण एवं देहात क्षेत्रों में कार्य करने वाले पत्रकारों को तहसील स्तर पर स्थानीय अधिमान्यता प्रदान करने तथा अधिमान्यता के लिए निर्धारित 20 वर्ष के अनुभव की शर्त को घटाकर 10 वर्ष करने की मांग की गई।इसके साथ ही अधिमान्यता एवं श्रद्धा निधि के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण तथा श्रद्धा निधि के लिए निर्धारित आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने की मांग भी रखी गई।

स्वास्थ्य बीमा 10 लाख रुपये करने की मांग।          ज्ञापन में पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना की राशि 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने तथा पत्रकारों के हिस्से की प्रीमियम राशि कम करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके अलावा पत्रकारों के आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाने की मांग भी की गई।

आवास, प्रेस क्लब और यात्रा रियायत का मुद्दा।       परिषद ने जबलपुर, भोपाल सहित प्रत्येक जिला मुख्यालय पर शासकीय योजनाओं के तहत निर्मित आवासों में पत्रकारों को आरक्षित श्रेणी में आवास आवंटित करने की मांग की। पत्रकारों की सामाजिक एवं मनोरंजन गतिविधियों के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय पर प्रेस क्लब हेतु भूमि उपलब्ध कराने तथा साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं की विज्ञापन नीति में सुधार की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।इसके साथ ही पत्रकारों के लिए रेलवे एवं बस यात्रा में पूर्व की भांति रियायत सुविधा बहाल करने की मांग शासन के समक्ष रखी गई।

कोविड में दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को सहायता की मांग                                                                    परिषद ने कोविड-19 महामारी के दौरान असामयिक मृत्यु का शिकार हुए पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा परिवार के एक सदस्य को शासकीय सेवा में नियुक्ति देने की मांग भी उठाई।

पांच साल से नहीं बनी पत्रकार समितियां।              ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग की पत्रकार समितियों का निर्धारित नियमों के अनुसार नियमित गठन किए जाने की मांग की गई। परिषद ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से इन समितियों का गठन नहीं हुआ है। पत्रकारों की समस्याओं के उचित निराकरण तथा पत्रकार हितों से जुड़े मामलों में संवाद के लिए समितियों का शीघ्र गठन आवश्यक है।

पत्रकारों की प्रमुख मांगें

– पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं प्रभावी कानून बनाया जाए।

– ग्रामीण पत्रकारों को तहसील स्तर पर स्थानीय अधिमान्यता प्रदान की जाए।

– अधिमान्यता के लिए 20 वर्ष की अनुभव सीमा घटाकर 10 वर्ष की जाए।

– अधिमान्यता एवं श्रद्धा निधि के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए।

– श्रद्धा निधि की आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष की जाए।

– पत्रकार स्वास्थ्य बीमा की राशि 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जाए।

– पत्रकारों की प्रीमियम राशि कम की जाए और आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता से बनाए जाएं।

– पत्रकारों को आवास की आरक्षित सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

– प्रत्येक जिला मुख्यालय पर प्रेस क्लब के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाए।

– साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं की विज्ञापन नीति में सुधार किया जाए।

– पत्रकारों के लिए रेलवे एवं बस यात्रा रियायत बहाल की जाए।

– कोविड में दिवंगत पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को शासकीय नौकरी दी जाए।

– जनसंपर्क विभाग की पत्रकार समितियों का नियमित गठन किया जाए।

– पत्रकारों से जुड़े लंबित मामलों पर समयबद्ध एवं सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

अधिवेशन में पत्रकारों ने एकजुट होकर शासन से मांग की कि पत्रकारों से जुड़े लंबित मामलों का सकारात्मक एवं समयबद्ध निराकरण किया जाए। अनूपपुर जिले से राजेश शुक्ला एवं चैतन्य मिश्रा की सक्रिय सहभागिता से जिले के पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रदेश स्तरीय मंच पर प्रभावी ढंग से रखा गया।

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