899 रोजगार के लक्ष्य पर उठे सवाल, प्रभावित ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन से मांगा जवाब; रोजगार से वंचित लोगों की बहाली की मांग
रिपोर्ट-मुकेश राय
अनूपपुर। एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र में रोजगार संबंधी प्रकरणों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 को अनूपपुर कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में आयोजित डीआरआरसी (पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन समिति) की बैठक विवादों के घेरे में आ गई। बैठक में आमा डांड, निमहा और कुहका गांव के लगभग आधा सैकड़ा ग्रामीण अपनी समस्याएं रखने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सभागार में मौजूद ग्रामीणों को कुछ अधिकारियों द्वारा बाहर कर दिया गया और कहा गया कि बैठक में केवल गांव के सरपंच ही प्रतिनिधित्व करेंगे। इस घटनाक्रम से नाराज ग्रामीणों ने बैठक की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए डीआरआरसी की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
यह बैठक प्रकरण क्रमांक 1222/2018 में 9 मई 2025 को पारित आदेश के परिपालन के संदर्भ में आयोजित की गई थी। बैठक में एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र के रोजगार संबंधी मामलों पर चर्चा होनी थी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें बैठक में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।
899 रोजगार के लक्ष्य पर सरपंच ने उठाए सवाल
बैठक के दौरान निमहा की सरपंच श्रीमती जमुनी बाई और उपसरपंच श्रीमती श्याम बाई ने रोजगार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनकी मांग थी कि वर्तमान में रोजगाररत लोगों को काम करने दिया जाए, जिन लोगों को रोजगार से वंचित कर दिया गया है, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए और 899 रोजगार के निर्धारित लक्ष्य में शेष बचे रोजगार की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्हें पूरा किया जाए।
सरपंच का आरोप है कि एसईसीएल अधिकारियों द्वारा रोजगार संबंधी जानकारी स्पष्ट और संतोषजनक ढंग से प्रस्तुत नहीं की गई। अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट होकर उन्होंने नाराजगी जताई और बैठक की कार्यवाही पर अपनी सहमति नहीं दी।
सरपंच जमुनी बाई बोलीं—अधूरी जानकारी दी गई
निमहा की सरपंच श्रीमती जमुनी बाई ने कहा कि एसईसीएल अधिकारियों द्वारा दी जा रही जानकारी आधी-अधूरी थी और उसे समझना मुश्किल था। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 899 रोजगार के संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।उनका कहना था कि जो लोग वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं, उन्हें रोजगार जारी रखने दिया जाए और जिन्हें नौकरी से बैठा दिया गया है, उन्हें तत्काल बहाल किया जाए। सरपंच के अनुसार, उनकी मांगों को अनसुना किया गया। इसी कारण उन्होंने डीआरआरसी की बैठक में हुई कार्यवाही पर सहमति नहीं जताई और हस्ताक्षर भी नहीं किए।
श्रीमती जमुनी बाई ने सभागार से ग्रामीणों को बाहर किए जाने पर दुख जताते हुए कहा कि प्रभावित ग्रामीण अपनी समस्याएं रखने के लिए पहुंचे थे। उन्हें बाहर किए जाने से वह बेहद आहत हैं और इसी कारण डीआरआरसी की प्रक्रिया का बहिष्कार करती हैं।इस दौरान निमहा की उपसरपंच श्रीमती श्याम बाई ने भी रोजगार संबंधी मांगों और ग्रामीणों की भागीदारी के मुद्दे पर असंतोष जताया।
ग्रामीणों ने कहा—प्रभावित किसानों को क्यों किया बाहर?
आमाडांड के भवेंद्र जायसवाल और कोमल केवट सहित उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित डीआरआरसी की बैठक में तीन गांवों के सरपंचों को बुलाया गया था। प्रभावित किसान और ग्रामीण भी अपनी बात रखने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सभागार से बाहर कर दिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बाद आमाडांड, निमहा और कुहका के सरपंचों को बैठक के लिए बुलाया गया, लेकिन उनकी जानकारी के अनुसार केवल दो सरपंच ही उपस्थित हुए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसईसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक की कार्यवाही जारी रही, जबकि प्रभावित ग्रामीण बाहर रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेते समय प्रभावित परिवारों की समस्याओं और मांगों को सुनना जरूरी है। उनका सवाल है कि जब रोजगार संबंधी प्रकरणों का सीधा असर गांव के लोगों पर पड़ता है, तो उन्हें अपनी बात रखने से क्यों रोका गया?
न्यायालय के आदेश के पालन और रोजगार की स्थिति पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद रोजगार संबंधी प्रकरणों में पारदर्शिता और प्रभावित ग्रामीणों की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि न्यायालय के आदेश के परिपालन में की जा रही कार्यवाही की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए। साथ ही 899 रोजगार के लक्ष्य में अब तक कितने लोगों को रोजगार मिला, कितने पद या रोजगार शेष हैं और रोजगार से वंचित किए गए लोगों के मामलों में क्या निर्णय लिया गया है, इसकी स्थिति सार्वजनिक की जाए।
अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि बैठक में ग्रामीणों को सभागार से बाहर रखने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और आगे प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
अब सवाल यह है कि क्या एसईसीएल प्रबंधन 899 रोजगार के लक्ष्य के तहत शेष रोजगार की स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या रोजगार से वंचित लोगों की बहाली और प्रभावित ग्रामीणों की मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा? साथ ही, क्या आगामी बैठकों में प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा?



