विजयादशमी पर उज्जैन में राजसी वैभव के साथ निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी, शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा पूजन

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धार्मिक नगरी उज्जैन में विजयादशमी के अवसर पर भगवान महाकाल की सवारी इस बार राजसी वैभव और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। मंगलवार, 20 अक्टूबर को निकलने वाली इस विशेष सवारी में धार्मिक परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और भारतीय लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। बाबा महाकाल नगर भ्रमण करते हुए शमी वृक्ष के पूजन के लिए दशहरा मैदान पहुंचेंगे।

राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण करेंगे बाबा महाकाल
श्री महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। विजयादशमी पर उनकी विशेष सवारी निकाली जाती है। इस दौरान भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। सवारी के मार्ग पर श्रद्धालुओं को धार्मिक उल्लास और पारंपरिक वैभव का अनुभव होगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस बार सवारी को ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी की गई है। आयोजन में वेदपाठी बटुकों के मंत्रोच्चार, विभिन्न बैंडों की मधुर धुनों और जनजातीय कलाकारों के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

200 से अधिक वेदपाठी करेंगे अगवानी
भगवान महाकाल की सवारी के दौरान 200 से अधिक वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रों के साथ अगवानी करेंगे। वहीं, चित्रकार अपनी तूलिका के माध्यम से उज्जयिनी के गौरव और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेंगे। विभिन्न बैंडों की प्रस्तुतियों और पारंपरिक कलाओं से सवारी का वातावरण भक्तिमय बनेगा।

आयोजन का उद्देश्य उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भव्य रूप में प्रस्तुत करना है।

शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा पूजन
विजयादशमी पर शमी वृक्ष और शस्त्रों की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी परंपरा के तहत भगवान महाकाल की सवारी दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह भगवान महाकाल, शमी वृक्ष और शस्त्रों का विधिवत पूजन करेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी वृक्ष की पूजा विजय, साहस और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी शक्ति, सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

श्रद्धालुओं में उत्साह, परंपरा के होंगे दर्शन
विजयादशमी पर निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस आयोजन में भगवान महाकाल के प्रति आस्था के साथ शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी दिखाई देती है। राजसी सवारी, वैदिक मंत्रोच्चार और लोककलाओं की प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर धर्म और परंपरा के इस विशेष पर्व के साक्षी बनेंगे।

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