*निलंबित व्याख्याता देवेंद्र कुमार साहू नौकरी से हुआ पदच्युत

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*अनूपपुर* अनूपपुर जिले में शिक्षा विभाग के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लतार में व्याख्याता के पद पर पदस्थ देवेंद्र कुमार साहू पर दहेज प्रतिरोध अधिनियम पंजीबद्ध होने के कारण जिला जेल अशोकनगर में निरुद्ध होने के मामले में संभागायुक्त शहडोल द्वारा 2020 में पद से निलंबित कर दिया गया था,पत्र क्रमांक /- 292/1511788 / 2023/25/18 संभागायुक्त शहडोल सभाग द्वारा शिकायतकर्ता मुरलीधर मिश्रा,निवासी बेडियाबडी जिला अनूपपुर द्वारा दिनांक 12.10.2020 को दिए गए शिकायत के आधार पर कलेक्टर जिला अनूपपुर द्वारा अपने पत्र दिनांक 23.10.2020 के माध्यम से देवेन्द्र कुमार साहू व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. लतार जिला अनूपपुर के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए निलंबित व्याख्याता को सेवा से पदच्युत किये जाने की अनुशंसा की गई थी।

*यह है पूरा मामला*
देवेन्द्र कुमार साहू के विरुद्ध थाना कैन्ट जिला गुना में अपराध कमांक 337/1997 अंतर्गत धारा 498ए / 34भा.द.सं.1960 एवं 3/4 दहेज प्रतिरोध अधिनियम पंजीबद्ध किया जाकर साहू को गिरफ्तार कर गुना न्यायालय में पेश किया गया तत्पश्चात भौगोलिक क्षेत्राधिकार के आधार पर प्रकरण माननीय न्याययिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला अशोकनगर को हस्तांतरित किया गया।मुख्य न्याययिक दण्डाधिकारी अशोकनगर के आपराधिक प्रकरण क्रमांक 411/2007 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय दिनांक 11.06.2009 द्वारा अभियुक्त को धारा 498ए के अपराध में डेढ़-डेढ वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक-एकहजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।अर्थदण्ड की राशि अदा करने पर व्यक्तिकम पर अभियुक्तगण को छः-छः माह का कारावास पृथक से भुगतने का आदेश दिया गया।माननीय न्यायालय अशोकनगर के उक्त आपराधिक प्रकरण क्रमांक 411/2007 में पारित निर्णय दिनांक 11.06.2009 के विरूद्ध देवेन्द्र कुमार साहू द्वारा माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश अशोकनगर को अपील की गई,जो कि आपराधिक अपील कमांक 71-77/ 2009 पंजीबद्ध की गई।द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश अशोकनगर द्वारा दिनांक 18.04.2011 द्वारा उक्त आपराधिक प्रकरण क्रमांक 77/ 2009 सारहीन होने के कारण निरस्त करते हुए पूर्व आदेश दिनांक 11.06.2009 को यथावत रखा गया।न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश अशोकनगर द्वारा पारित निर्णय दिनांक 18.04.2011 अनुसार अपील निरस्त होने पर साहू दिनांक 18.04.2011 से 27.04.2011 तक जिला जेल अशोक नगर में सजा में निरूद्ध रहा। साहू द्वारा उक्त जानकारी विभाग से छुपाई जाकर उक्त अवधि का अर्जित अवकाश कूटरचित ढंग से स्वीकृत कराया जाकर वेतन आदि प्राप्त किया गया तथा शासन द्वारा प्रदाय समस्त लाभों का उपभोग किया जाना उल्लेखित किया गया।साहू के इस कृत्य के कारण कलेक्टर जिला अनूपपुर द्वारा की गई अनुशंसा के आधार पर संभागायुक्त शहडोल संभाग शहडोल के आदेश दिनांक 11.11.2020 द्वारा साहू को निलंबित किया गया तत्पश्चात दिनांक 11.12.2020 साहू को जारी आरोप पत्र का साहू द्वारा सार्थक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश अशोकनगर द्वारा पारित निर्णय दिनांक 18.04.2011 के विरूद्ध साहू द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका कमांक सीआर आर 355 /2011 दायर
की गई जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 25/04/2011 को निर्णय पारित करते हुए उक्त दण्डादेश के पुनरीक्षण होने तक सजा को निलंबित किया गया एवं राशि रूपये 25,000/- का व्यक्तिगत बॉण्ड जमा कराया जाकर साहू को जमानत पर रिहा किया गया।देवेन्द्र कुमार साहू के उक्त कृत्य के कारण सभागायुक्त शहडोल संभाग शहडोल के पत्र
दिनांक 21.07.2023 द्वारा देवेन्द्र कुमार साहू (निलंबित व्याख्याता) को मप्र सिविल सेवा(वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 नियम 10 ( 9 ) के तहत सेवा से पदच्युत किये जाने की अनुशंसा की गई है।मान उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा याचिका कमांक सीआर.आर. 355/2011 में पारित निर्णय दिनांक 25.04.2011 में केवल अपचारी कर्मचारी को “जमानत पर छोड़ा गया है,किन्तु आरोपों से मुक्त नही किया है।भ्रष्टाचार के प्रकरणों में न्यायालय द्वारा दोष सिद्धि होने पर संबंधित शासकीय
सेवक के विरूद्ध त्वरित कार्यवाही के बारे में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक सी-6-2/98/3/1 दिनांक 08.02.1999 की कंण्डिका-2(क) में सेवारत शासकीय सेवकों के मामलों में शासकीय सेवक यदि किसी आपराधिक प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध पाये जाते है जिसमें उनका नैतिक पतन अंतर निहित हो तो यह अपेक्षा है कि उसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 (नौ) अंतर्गत सेवा से पदच्युत करने की शास्ति अधिरोपित किये जाने के निर्देश है।उक्त निर्देश में यह भी स्पष्ट किया है कि शासकीय सेवक ने अपनी दोष सिद्धि के विरूद्ध अपीलीय न्यायालय में “अपील की है और अपीलीय न्यायालय ने दोष सिद्धि को “स्थगन” न देकर मात्र “सजा” को स्थगित किया है तो भी उक्तानुसार शास्ति अधिरोपित की जा सकती है। उक्त प्रकार के प्रकरणों में उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टांत के अनुसार म.प्र.सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 नियम-19 सहपठित नियम 14 एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (अ) के अंतर्गत अपचारी शासकीय सेवक के विरूद्ध विस्तृत विभागीय जांच आवश्यक नही है,साथ ही संबंधित शासकीय सेवक को कार्यवाही के पूर्व कोई सूचना देना भी आवश्यक नही है अर्थात दण्डादेश सीधे पारित एवं जारी किया जा सकता है।सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक सी-6-2/98-3-1 दिनांक 26.05.1998 सहपठित कमांक सी -6-2/98/3/1 दिनांक 08.02.1999 की कंडिका 2 (क) के प्रावधानुसार देवेन्द्र कुमार साहू (निलंबित व्याख्याता) प्रभारी प्राचार्य, शा.उ.मा.वि. लतार जिला अनूपपुर म.प्र. को म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 (नौ) के अंतर्गत “सेवा से पदच्युत “किये जाने का प्रशासकीय निर्णय लिया गया।
अतः राज्य शासन द्वारा दिनांक 16/02/2024 को देवेन्द्र कुमार साहू (निलंबित व्याख्याता) प्रभारी प्राचार्य शा.उ.मा.वि. लतार जिला अनूपपुर को म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 (नौ) के अंतर्गत “सेवा से पदच्युत” करने आदेशित किया गया।

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