ईरान में आसमान से गिरा ‘जहरीला पानी’, तेल डिपो पर हमलों ने पैदा की पर्यावरणीय तबाही

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ईरान में आसमान से गिरा ‘जहरीला पानी’, तेल डिपो पर हमलों ने पैदा की पर्यावरणीय तबाही
ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब केवल बम-धमाकों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका असर कुदरत के जानलेवा बदलावों के रूप में दिखने लगा है. अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद ईरान के आसमान से पानी नहीं, बल्कि काली स्याही जैसा तरल बरस रहा है. तेल डिपो और रासायनिक ठिकानों पर हुए हमलों ने हवा में इतना जहर भर दिया है कि अब बादलों का रंग सफेद से काला पड़ चुका है. यह काली बारिश ईरान के नागरिकों के लिए युद्ध से भी बड़ा खतरा बनती जा रही है.

क्या है काली बारिश और यह इतनी दुर्लभ क्यों है?
वैज्ञानिक भाषा में काली बारिश एक ऐसी वायुमंडलीय घटना है जो केवल भीषण औद्योगिक आपदाओं या युद्ध के समय ही देखी जाती है. जब मिसाइल हमले तेल डिपो या रिफाइनरियों को निशाना बनाते हैं, तो उससे निकलने वाली कालिख और अधूरे जले हाइड्रोकार्बन हवा में मीलों ऊपर तक चले जाते हैं. बारिश की बूंदें गिरते समय एक स्पंज या चुंबक की तरह काम करती हैं, जो इन जहरीले कणों को अपने भीतर समेट लेती हैं. यही कारण है कि जब यह पानी जमीन पर गिरता है, तो इसका रंग गहरा काला और गाढ़ा होता है.

इंसानों के लिए जहर
वायुमंडलीय रसायन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे केवल एसिड रेन कहना गलत होगा. सामान्य एसिड रेन में केवल सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल होते हैं, लेकिन ईरान में हो रही इस बारिश में हेवी मेटल्स और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) जैसे खतरनाक तत्व मिले हुए हैं. यह तेल के कुओं में लगी आग और फटने वाली मिसाइलों के धुएं का एक घातक मिश्रण है. ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि यह मिश्रण मानव त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए तत्काल प्रभावी जहर की तरह काम कर रहा है.

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