करियर में सफलता और तरक्की के लिए ‘विकट संकष्टी चतुर्थी’ है खास

0
21

नौकरी में बार-बार आ रही है बाधा? तो विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन ऐसे करें विघ्नहर्ता को प्रसन्न
जीवन में जब भी कोई काम अचानक अटकने लगे या कठिन मेहनत के बाद भी मनचाहा फल न मिले, तो हम अक्सर इसे अपनी फूटी किस्मत का दोष मान लेते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये केवल किस्मत नहीं बल्कि हमारे ग्रहों की चाल में आने वाली रुकावटें भी हो सकती हैं।

5 अप्रैल 2026, रविवार को पड़ने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी (Vikat Sankashti Chaturthi 2026 Date) का पावन दिन इन्हीं बाधाओं को दूर करने और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद पाने का सबसे बड़ा अवसर है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे गणपति की विशेष कृपा से कुंडली के बाधक योग शांत हो सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह दिन आत्म-चिंतन और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री।

विघ्नहर्ता और ग्रहों का गहरा संबंध
ज्योतिष में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और रिद्धि-सिद्धि का स्वामी माना गया है। विशेष रूप से बुध ग्रह पर इनका बहुत गहरा प्रभाव होता है। यदि आपकी कुंडली में बुध कमजोर स्थिति में है, तो इससे निर्णय लेने में भारी परेशानी, व्यापार में हानि और वाणी में दोष जैसी गंभीर समस्याएं आ सकती हैं।

संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन पर गणेश जी की सच्ची आराधना करने से बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे हमारे विचारों और कार्यों में स्पष्टता आती है। इसके अलावा, केतु के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने के लिए भी गणेश जी की पूजा सबसे अचूक और सरल उपाय मानी जाती है। जब हम सहजता से गणपति का ध्यान करते हैं, तो ग्रहों के कारण आने वाली मानसिक दुविधाएं दूर होती हैं और हमें अपने व्यवसाय के बेहतर संचालन की नई प्रेरणा मिलती है।

बाधक योगों से मुक्ति की राह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार हमारी कुंडली में कुछ ऐसे बाधक योग बन जाते हैं, जो अचानक हमारे बनते हुए कामों में बड़ी अड़चनें पैदा करने लगते हैं। असल में शनि देव भी ऐसे कठिन समय में हमें अनुशासन, संयम और असीम धैर्य का पाठ पढ़ाते हैं। उनकी दी गई यह सीख हमारी अपनी ही कमियों को पहचानने और उन्हें समय पर सुधारने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत होती है।

संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत और विधि-विधान से किया गया पूजन इन चुनौतीपूर्ण समय के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में बहुत मददगार साबित होता है। जब हम पूरी श्रद्धा के साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश का ध्यान करते हैं, तो मन की सारी पुरानी उलझनें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। इससे राहु जैसे छाया ग्रहों के कारण पैदा होने वाली बाधाएं और भ्रम भी शांत हो जाते हैं।

तनाव दूर करने का सरल मार्ग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को हमारे ‘मन’ का स्वामी माना गया है। हमारी भावनाओं का उतार-चढ़ाव और मानसिक स्थिति काफी हद तक चंद्रमा की स्थिति पर ही निर्भर करती है। संकष्टी चतुर्थी की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना केवल एक पुरानी धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मन को शांत और एकाग्र करने का एक बहुत ही तार्किक तरीका भी है।

जब हम व्रत के अनुशासन के साथ चंद्रमा की शीतलता का ध्यान करते हैं, तो मन की चंचलता दूर होती है। यह मानसिक शांति हमें राहु जैसे ग्रहों के कारण पैदा होने वाले भ्रम और डर से लड़ने की अद्भुत शक्ति देती है। जब हमारा मन पूरी तरह शांत होता है, तब हम अपने व्यवसाय और जीवन के अन्य क्षेत्रों में सही निर्णय ले पाते हैं, जिससे हमारी बड़ी इच्छाएं पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होता है।

नर्मदा भूमि के वेबसाइट के कुछ तत्त्वों में उपयोगकर्ताओं के द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली सामग्रियों में समाचार/फोटो/ वीडियो इत्यादि विषय वस्तुएं शामिल होंगी। "नर्मदा भूमि" इस तरह की सामग्रियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। "नर्मदा भूमि" वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी सामग्री के लिए संवाददाता/ ख़बर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा। "नर्मदा भूमि" वेबसाइट या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here