जिला कांग्रेस ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप कर किया निष्पक्ष कार्यवाही की मांग

अनूपपुर जिले के बिजुरी क्षेत्र में हुई हृदय विदारक घटना के बाद अब पुलिस जांच और जारी किए गए प्रेस नोट पर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है, वहीं विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों द्वारा जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया जा रहा है। घटना के बाद बिजुरी पुलिस ने गोलमोल कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कही गई है लेकिन पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया है। सबसे बड़ा सवाल युवती की उम्र को लेकर खड़ा हुआ है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में पीड़िता को 20 वर्षीय बताया गया है जबकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने युवती को 17 वर्षीय नाबालिग बताया है उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार काफी डरा और सहमा हुआ है

इसी मामले को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान के अगुवाई में विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह, जिला कांग्रेस कोषाध्यक्ष जेपी श्रीवास्तव, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष संतोष पाण्डेय, जिला कांग्रेस महासचिव निर्भय नारायण राव, गौ संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ व्हीपीएस चौहान, वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष मिश्रा, जिला कांग्रेस सचिव आशु चतुर्वेदी, कांग्रेस बेरोजगार प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष मनोज बर्मन, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रफी अहमद, कांग्रेस मंडलम अध्यक्ष महेश धनवार दिनांक 22 मई को पुलिस अधीक्षक अनूपपुर विक्रांत मुराब से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा जिसमें कहा गया है कि बिजुरी निवासी नाबालिग बच्ची की संदेहात्मक स्थिति में दिनांक 20/05/2026 को मौत हो जाने का मामला सामने आया है सोशल मीडिया में चले खबरों के अनसार बच्ची के साथ सामूहित बलात्कार से मौत होने की बात कहीं जा रही थी, लेकिन बिजुरी पुलिस ने बिना निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच किये बिना ही इसे लूट का मामला बनाकर आरोपियों को बचाने एवं अपने जवाबदेही से बचने के लिये कहानी गढ़ रही है ज्ञापन में मांग किया गया कि बिजुरी पुलिस द्वारा नाबालिग पीड़िता की उम्र 20 वर्ष बताकर प्रेस नोट जारी कर दिया गया है, जबकि बच्ची मात्र 17 वर्ष की है, जिससे पुलिस पर संदेह होना स्वभाविक है। लिहाजा तत्काल थाना प्रभारी को हटाकर कार्यवाही किया जाए
बिजुरी पुलिस द्वारा जिसे फरियादी बताया जा रहा है, उसे नाबालिग बताया जा रहा है, जबकि वह उस बच्ची को लेकर सूनसान स्थान पर गया था, उसका मेडिकल परीक्षण कराकर उसे नाबालिग होने का दस्तावेज सार्वजनिक कराकर उचित वैधानिक कार्यवाही कराई जाये।
बच्ची के साथ गैंगरेप होने की बात सामने आ रही है लिहाजा सभी आरोपियों के अंतः वस्त्र जांचकर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया तथा थाना प्रभारी किसे ? और क्यो? बचाने के लिये कहानी गढ़ रहे हैं, जांच कराई जाए परिजनों ने बताया कि बच्ची के शरीर से खून निकल रहा था पुलिस ने इसे बतौर साक्ष्य जांच में क्यों नहीं लिया, न ही कहीं इसका जिक्र किया, जिससे बिजुरी पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता अनुविभाग के बाहर के अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि परिजनों ने बताया कि पीड़िता के हाथ में किसी आरोपी का बाल था जो उसने संघर्ष करते हुए नोचा था, जिसका जिक्र बिजुरी पुलिस ने नहीं किया है और न इस बिन्दु का वैज्ञानिक अनुसंधान कराया जा रहा है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। परिजनों ने बताया कि पीड़िता का मुंह बोला भाई जो बिहार का निवासी है, जब वह पीड़िता को उठाकर लाया तो बच्ची का खून उसके कपड़ो पर भी लगा था। कथित मुह बोले भाई ने भी इस बात को स्वीकार किया है, तब पुलिस ने इस बात को संज्ञान में लेकर जांच क्यों नहीं किया?
बिजुरी पुलिस ने बताया कि पीड़िता की मौत मुंह, नाक को हाथ से दबाने के कारण दम घुटने से हुई है तो सवाल उठना लाजमी है कि किस कारण से और किस अवस्था पर उसके मुंह को दबाया गया यदि हत्या करना ही मकसद होता तो गला दबाकर या प्राणघातक प्रहार कर भी हत्या की जा सकती थी, लेकिन बिजुरी पुलिस तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और इसे लूट की घटना बताने पर आमादा है थाना प्रभारी के अनुसार पीड़िता के दिल का ईलाज चल रहा था, जबकि परिजनों ने इसे शिरे से नकार दिया है और पुलिस के पास किसी भी तरह मेडिकल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है। बिजुरी पुलिस से आम लोंगो का विश्वास उठ चुका है। निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच कराने की जरूरत है
जब पीड़िता नाबालिग है और प्रथम दृष्ट्या बलात्कार की बात सामने आ रही थी तो बिना वैज्ञानिक अनुसंधान, जांच व बिना मेडिकल रिपोर्ट कराये और बिना जांच के बलात्कार की बात को पुलिस ने सीधे नकार दिया तो पुलिस पर अविश्वास होना स्वभाविक है जो लड़का पीड़िता को सूनसान जगह पर लेकर गया था, जिसके कारण यह घटना हृदय विदारक घटना घटी है, पुलिस उसे फरियादी बनाकर उसका मेडिकल परीक्षण न कराके अंतः वस्त्रों को जप्त कर जांच किये बिना किस आधार पर थाने में बैठाकर रखा है और परिजनो व आम लोगों से उसे मिलने नहीं दिया जा रहा है, इसकी भी जांच व इस लड़के के भूमिका की जांच कराई जानी चाहिए
लड़का पीड़िता के कथित मुंह बोले भाई जिसको जानकारी होने पर बिना पुलिस को सूचना दिये घटना स्थल पर पहुंचने, पीड़िता को अस्पताल लाने, पीड़िता को खून उसके कपड़े पर लगने की बात पुलिस से छिपाने एवं पीड़िता द्वारा आखिरी शब्द कि मैं बहुत थक गई हूँ, जैसे बिन्दुओं की निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच की जानी चाहिए पीड़िता के साथ अमानवीय व्यवहार में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से और कौन-कौन शामिल है, जैसे बिन्दुओं की भी जांच होनी चाहिए पीड़िता कथित भाई व फरियादी के फोन डिटेल जांच कराई जानी चाहिए उपयुक्त बिन्दुओं पर निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच कर कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वप्रथम बिजुरी थाना प्रभारी को हटाकर उनके द्वारा बिना दस्तावेजों की जांच के पीड़ित को 20 वर्षीय बताकर प्रेसनोट जारी करना और विभाग की किरकिरी कराना, सोची समझी रणनीति है और लगता है कि वो किसी को बचाने की कोशिश कर रहे है, उनके खिलाफ विभागीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है
अंत में प्रशासन को चेताते हुए लेख किया गया कि समय अवधि में निष्पक्ष कार्यवाही न होने पर जिला कांग्रेस कमेटी आम जन मानस के साथ बड़े आंदोलन के लिये विवश होगी, जिसकी संपूर्ण जबावदेही आपकी होगी। पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए ऐसा महौल बनाने की मांग की गई है कि पीड़िता का परिवार बिना डर के अपनी बातों को आपसे बता सकें। पीड़िता के परिवार पर किसी तरह का अनुचित दवाब किसी भी हाल में बर्दास्त नहीं किया जा सकता। पुलिस अधीक्षक ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्यवाही करने की बात कही है



