*अनूपपुर* अनूपपुर जिले में शराब दुकानों का ठेका एक ही व्यक्ति वीरेन्द्र राय को मिलने के बाद से लगातार शराब दुकानों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिले की 21 शराब दुकानों पर ग्राहकों से एमआरपी से अधिक वसूली, अवैध कारोबार, रेट लिस्ट और बिल उपलब्ध न कराना आम बात बन गई है। स्थानीय लोग लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन में भी इस मामले से जुड़ी सर्वाधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन आबकारी विभाग की चुप्पी ने गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
*एमआरपी से 100 रुपए तक की अवैध वसूली*
सूत्रों के अनुसार,कई दुकानों पर 200 रुपए एमआरपी वाली बोतल ग्राहकों को 280 से 300 रुपए तक बेची जा रही है। यानी प्रति बोतल 80 से 100 रुपए की वसूली। यह स्थिति बताती है कि एक दिन में ही हजारों-लाखों रुपए का अवैध मुनाफा दुकानदार कमा रहे हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ खुला अन्याय भी है। एमआरपी से अधिक रेट की वसूली पर आये दिन विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, कई बार थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित दुकान में पुलिस ने समय पर पहुंचकर विवाद को शांत कराया गया है।
*न रेट लिस्ट,न बिल – ग्राहक पूरी तरह अंधेरे में*
जिले की सभी शराब दुकानों पर न तो रेट लिस्ट प्रदर्शित की गई है और न ही ग्राहकों को बिल दिया जा रहा है। इस वजह से खरीदारों को यह पता ही नहीं चलता कि वे कितनी राशि अधिक चुका रहे हैं। मजबूरी में लोग शराब की बोतल में अंकित एमआरपी राशि से अधिक रूपये वसूलने पर वाद विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। जहां दुकानदार उन्हे दुकान से या तो शराब देने से मना कर दिया जाता है। जहां पर उपभोक्ता द्वारा सीएम हेल्पलाईन में मनमानी वसूली की शिकायत दर्ज करवाने को मजबूर हो जाते हैं।
*ऐसे होता है शिकायतों का निराकरण*
एक मामला तब प्रकाश में आया जब रवि तिवारी निवासी वार्ड क्रमांक 11 कॉलोनी देवहरा ने शराब दुकान देवहरा पर अधिक कीमत व बिल न देने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई।शिकायत में आरोप था कि अरुण राय द्वारा जिला अधिकारी को मैनेज करने का प्रयास किया गया, जो सभी शराब उपभोक्ताओं को बताकर कहीं भी शिकायत करने की धमकी देता है। जाँच के बाद विभाग ने बताया कि 16 सितम्बर को आबकारी उपनिरीक्षक वृत्ता अनूपपुर ने जांच की। जांच में दुकान से पर्चेजर को 150 रुपये में बोल्ट बीयर दिया गया, जो एमएसपी एवं एमआरपी के अनुरूप था। हालांकि, शिकायतकर्ता ने जांच के समय दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच और जांचकर्ता अधिकारी के निष्कर्ष पर सवाल उठाए और निराकरण से असंतोष जाहिर किया, जिस पर जांच आगे बढ़ा दी गई।
*आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इतने लंबे समय से यह शिकायतें सामने आ रही हैं तो आबकारी विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करती है। विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
*जनता की भी बनती है जिम्मेदारी*
विशेषज्ञों का कहना है कि इस लड़ाई में जनता की भागीदारी भी आवश्यक है। यदि किसी दुकान पर रेट लिस्ट नहीं लगी हो, बिल नहीं दिया जा रहा हो या एमआरपी से अधिक राशि वसूली जा रही हो, तो ग्राहक तत्काल आबकारी विभाग, कलेक्टर कार्यालय या सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जिले में लंबे समय से जारी इस ओवररेटिंग प्रथा ने शासन और विभागीय व्यवस्था की पोल खोल दी है।सवाल साफ है कि आखिर कब तक आबकारी विभाग इन शिकायतों पर आंख मूंदकर बैठे रहेगा और शराब उपभोक्ताओं का शोषण होता रहेगा..?
*इनका कहना है*
जिले के समस्त 21 शराब दुकानों में अगर रेट लिस्ट या बार कोड चस्पा नही किया गया है या फिर एमआरपी से अधिक की वसूली करते हुए उपभोक्ताओं को बिल नही दिया जाता है, तो निश्चित ही जांच करते हुए कार्यवाही की जाएगी।
*खेमराज श्याम*
जिला आबकारी अधिकारी अनूपपुर



