*भालू के जबड़ों के बीच 14 जिंदगियां, वन विभाग को सूचना के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

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अनूपपुर। एक ओर वन विभाग खांड़ा क्षेत्र को भालू विचरण क्षेत्र मानता है, वहीं दूसरी ओर इसी संवेदनशील इलाके में बाहरी लोगों के झोपड़ियां बनाकर रहने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत खांड़ा के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के अनुसार यहां शिवपुरी जिले के गोदरी क्षेत्र से आए लोग झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। बताया गया है कि मौके पर परिवार सहित लोग रह रहे हैं और इनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल केवल अवैध रूप से ठहरने का नहीं, बल्कि इन लोगों की जान की सुरक्षा का भी है।ग्राम पंचायत खांड़ा की सरपंच कमला सिंह एवं सचिव गोरेलाल केवट द्वारा मौके पर पंचनामा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पंचनामा में मौके पर मौजूद लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। पूछताछ में उनके द्वारा बताया गया कि उन्हें अनूपपुर के ठेकेदार लकी वर्मा द्वारा काम कराने के लिए यहां लाया गया है।

*भालू विचरण क्षेत्र में झोपड़ियां किसकी अनुमति से?*।                                                                   मामले ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब यह क्षेत्र भालू विचरण क्षेत्र के रूप में चिन्हित है और यहां पूर्व में भालू के हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं, तो आखिर बाहरी लोगों को इस स्थान पर झोपड़ियां बनाकर रहने की स्थिति कैसे बनी?स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जहां ये लोग रह रहे हैं, वह भूमि वनभूमि का हिस्सा है और लोगों को वहां ठहराने की अनुमति किसके द्वारा दी गई, यह जांच का विषय है। यदि भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है तो विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

*रेंजर को फोन पर सूचना देने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं-रमेश सिंह*।                                         पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व अनूपपुर विधायक प्रत्याशी रमेश सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं संबंधित वन विभाग के रेंजर को टेलीफोन पर इस स्थिति की जानकारी दी और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करने की बात कही। रमेश सिंह का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

रमेश सिंह ने कहा कि भालू विचरण क्षेत्र में छोटे बच्चों और परिवारों के साथ लोगों का इस तरह रहना किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं माना जा सकता। यदि विभाग को स्थिति की जानकारी होने के बाद भी समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते हैं और भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारियों की होगी।उन्होंने कहा कि वन विभाग की जिम्मेदारी केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई करना चाहिए।

*जानकारी के बाद भी चुप्पी क्यों?*।                     इस पूरे मामले में सबसे गंभीर प्रश्न यही है कि यदि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को लोगों के इस तरह रहने की जानकारी दी जा चुकी थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई? क्या विभाग की टीम मौके पर पहुंची? क्या वहां रहने वाले लोगों को संभावित भालू हमले के खतरे के बारे में चेतावनी दी गई? क्या उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया गया? और सबसे अहम ,यदि यह वनभूमि है तो वहां झोपड़ियां बनने की अनुमति किसने दी?इन सवालों के जवाब अब वन विभाग की जांच से ही सामने आ सकते हैं।

*हादसे का इंतजार या सुरक्षा की तैयारी?*।         खांड़ा क्षेत्र में मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष की आशंका को देखते हुए मामला बेहद संवेदनशील है। यदि संबंधित लोगों के पास वास्तव में रहने की वैध अनुमति नहीं है तो प्रशासन को उसकी जांच करनी होगी और यदि उन्हें किसी काम के लिए ठेकेदार द्वारा लाया गया है तो उनके सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

वहीं, यदि वन विभाग को पहले से इस स्थिति की जानकारी थी और इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विभागीय स्तर पर गंभीर लापरवाही के आरोपों की जांच का विषय बनता है।फिलहाल ग्राम पंचायत के पंचनामा और रमेश सिंह द्वारा वन विभाग को दी गई सूचना के बाद गेंद संबंधित विभाग के पाले में है। अब देखना यह है कि वन विभाग किसी संभावित हादसे से पहले कार्रवाई करता है या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू होती है।

*इनका कहना है*                                          “जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को वहां से हटकर गांव में सुरक्षित स्थान पर मकान लेकर रहने के निर्देश दिए गए हैं।”

स्वर्ण गौरव सिंह                                                     रेंजर,वन परिक्षेत्र अनूपपुर

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