वित्तीय मजबूती के बावजूद नए संकट का खतरा, RBI गवर्नर ने किया अलर्ट

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भारतीय वित्तीय व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन भविष्य के संभावित जोखिमों को लेकर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सतर्क रहने की जरूरत बताई है। 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय मजबूती को भविष्य के संकट से सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।

मल्होत्रा के मुताबिक लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता रहने से संस्थानों और निवेशकों में अधिक जोखिम लेने तथा कर्ज बढ़ाने की प्रवृत्ति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी वित्तीय तनाव के दौर देख चुका है और कमजोरियों को समय रहते पहचानना जरूरी है।

बैंकिंग सिस्टम से बाहर से भी आ सकता है संकट
RBI गवर्नर ने चेताया कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ही शुरू हो। भू-राजनीतिक घटनाएं, साइबर हमले और तकनीकी गड़बड़ियां भी वित्तीय व्यवस्था में बड़े व्यवधान का कारण बन सकती हैं। वैश्विक वित्तीय नेटवर्क की बढ़ती आपसी निर्भरता के कारण एक जगह पैदा हुआ संकट दूसरे क्षेत्रों तक तेजी से फैल सकता है।

उन्होंने वित्तीय स्थिरता के लिए बैंकों के साथ-साथ NBFC, वित्तीय बाजार, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को भी मजबूत बनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार लक्ष्य हर संकट को रोकना नहीं, बल्कि वित्तीय व्यवस्था को ऐसे तैयार करना है कि वह झटकों को सह सके और उनके प्रभाव को सीमित रखे।

RBI गवर्नर ने बेहतर डेटा, जोखिम की निगरानी, मजबूत संस्थानों और प्रभावी नियमन को वित्तीय स्थिरता के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में सतर्कता और सिस्टम की मजबूती बनाए रखना जरूरी है।

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