कस्बों और ग्रामीण अंचलों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध दवाखाने, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल_
_सीएमएचओ कार्यालय द्वारा आरटीआई में दी गई 50 से अधिक क्लीनिकल संस्थानों की अधिकृत सूची
*अनूपपुर* जिले के कस्बों और ग्रामीण अंचलों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब्स की हकीकत अब आधिकारिक तौर पर सामने आ गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जारी की गई सूची ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़े बताते हैं कि पूरे जिले में पंजीकृत क्लीनिकल संस्थानों की संख्या बेहद सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि हर गली-मोहल्ले और हाट-बाजार में बिना बोर्ड या फर्जी दावों के साथ धड़ल्ले से क्लीनिक संचालित हो रहे हैं।
*आरटीआई से बेपर्दा हुई जमीनी हकीकत*
जिले के एक वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत स्वास्थ्य विभाग से वैध व पंजीकृत क्लीनिकल संस्थानों की प्रमाणित सूची मांगी गई थी। इसके जवाब में सीएमएचओ कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा 50 से अधिक संस्थानों की आधिकारिक सूची सौंपी गई है। इस सूची में अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी, पुष्पराजगढ़ और बिजुरी क्षेत्र के वैध एक्स-रे सेंटर, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और एलोपैथिक/आयुर्वेदिक प्रतिष्ठान दर्ज हैं।
*बड़ा सवाल: जो सूची में दर्ज नहीं, उन पर किसकी मेहरबानी?*
दस्तावेजों में दर्ज सीमित नामों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं,कि सैकड़ों अवैध दवाखाने किसके संरक्षण में? जिले के प्रमुख कस्बों जैतहरी, कोतमा, बिजुरी, राजेंद्रग्राम सहित सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम चल रहे सैकड़ों दवाखाने आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं? क्या स्वास्थ्य विभाग के पास इन पंजीकृत संस्थानों के अलावा धड़ल्ले से चल रहे अवैध व झोलाछाप डॉक्टरों का कोई डेटा या कार्रवाई का रिकॉर्ड है?
*पैथी का घालमेल और डिग्रियों की जांच*
कई मामलों में पंजीयन आयुर्वेद या होम्योपैथी का होता है, लेकिन इलाज में धड़ल्ले से हेवी एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड और एलोपैथिक दवाएं दी जाती हैं। क्या विभाग कभी इनकी शैक्षणिक डिग्रियों, स्टाफ की योग्यता और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों की औचक जांच करता है?
*मरीजों की जान और जेब दोनों से खिलवाड़*
स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अधिकृत सूची का सामने आना आम नागरिकों के लिए आंखें खोलने वाला है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बिना किसी मेडिकल डिग्री और वैध पंजीयन के बैठे कथित डॉक्टर गंभीर बीमारियों का गलत इलाज कर मरीजों की जान जोखिम में डालते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों ने अब गेंद पूरी तरह जिला प्रशासन और सीएमएचओ के पाले में डाल दी है कि वे कागजों से बाहर निकलकर बिना पंजीयन संचालित हो रहे इन अवैध केंद्रों पर कब सख्त कार्रवाई करते हैं।
*(”नोट: मरीज इलाज से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित डॉक्टर या पैथोलॉजी केंद्र स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत है या नहीं।”)*



