बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति में उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा नई शुरुआत, साहस और सफलता का प्रतीक है। इस दिन शमी वृक्ष और देवी अपराजिता की पूजा के साथ दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, विजयादशमी पर कुछ पारंपरिक उपाय किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इनसे सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है। हालांकि, इन उपायों के परिणाम की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
विजयादशमी पर किए जाने वाले 10 पारंपरिक उपाय
1. करियर में सफलता के लिए सरसों का उपाय
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, दशहरे पर एक चुटकी पीली या काली सरसों को बहते जल में प्रवाहित करने का विधान बताया गया है। इसे नौकरी और व्यापार में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। जल में कुछ भी प्रवाहित करने से पहले पर्यावरण और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।
2. नौकरी में तरक्की के लिए दान
मान्यता के अनुसार, सिंघाड़े के आटे की रोटियां बनाकर उनके साथ मूली जरूरतमंद व्यक्ति को दान की जा सकती है। इसे करियर में उन्नति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
3. आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए
दशहरे पर मंदिर में सरसों के तेल का दान करने की परंपरा बताई गई है। श्रद्धालु इसे आत्मबल और निर्णय क्षमता में वृद्धि की कामना के साथ कर सकते हैं।
4. परिवार में सुख-शांति के लिए
परिवार की खुशहाली की कामना से सफेद चंदन का तिलक लगाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसे आपसी सद्भाव, शांति और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है।
5. मानसिक शांति के लिए
सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल पर सुगंधित धूप जलाकर भगवान की आराधना करें। पूजा के दौरान कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताना मन को शांत रखने में सहायक हो सकता है।
6. नारियल का दान
हिंदू परंपरा में नारियल को शुभता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर मंदिर में जटा वाला नारियल अर्पित करने की मान्यता है। इसे शुभ कार्यों की शुरुआत और सकारात्मकता की कामना से जोड़ा जाता है।
7. चांदी के हाथी की स्थापना
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दशहरे पर चांदी का छोटा हाथी खरीदकर घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इसे दृढ़ संकल्प, बुद्धिमत्ता और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
8. सुख-सुविधाओं के लिए दान
दशहरे पर मंदिर में सिंघाड़े का आटा, फल या अन्य उपयोगी सामग्री दान करने की परंपरा बताई गई है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन और आवश्यक वस्तुएं देना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।
9. चंदन से जुड़ा पारंपरिक उपाय
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में दशहरे की रात सिरहाने चंदन का टुकड़ा रखकर सुबह उसे मंदिर में दान करने का उल्लेख है। इसे स्मरण शक्ति और बुद्धिमत्ता में वृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
10. शमी वृक्ष की पूजा
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु वृक्ष के सामने दीपक जलाकर, जल अर्पित कर और हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि तथा सफलता की प्रार्थना कर सकते हैं। पेड़ की टहनियां तोड़ने के बजाय वृक्ष की विधिवत पूजा करना बेहतर है।
नीलकंठ पक्षी के दर्शन का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं में विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना गया है। लोक परंपरा के अनुसार, इसे विजय, सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, पक्षी को देखने के लिए उसे परेशान करना या पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
दशहरे पर पूजा के साथ इन बातों का रखें ध्यान
विजयादशमी पर भगवान श्रीराम की पूजा, शमी वृक्ष का पूजन, शस्त्र पूजा और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। इस दिन लोग नए काम की शुरुआत भी शुभ मानते हैं। धार्मिक उपाय श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं; इन्हें निश्चित परिणाम देने वाला उपाय मानने के बजाय आस्था और सकारात्मक संकल्प के रूप में अपनाना चाहिए।
दशहरे का मूल संदेश अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय है। इसलिए इस अवसर पर सत्य, सदाचार, सेवा और आत्मविश्वास को जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी पर्व की सार्थकता बढ़ाता है।



