*अनूपपुर* जिले के अनूपपुर जनपद अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्याे सहित विभिन्न खरीदी के फर्जी बिलों की भरमार है,जिले की कोई भी पंचायत इन फर्जी बिलों से अछूती नहीं है,इसमें पंचायत स्तर के पंच, उपसरपंच से लेकर सरपंच,सचिव व जनपद व जिला पंचायत तक के अधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल हैं। मजे की बात तो यह है कि कागज के टुकड़ों पर प्रिंट फर्जी फर्मों के नाम पर लाखों के भुगतान हो रहे हैं और ये न तो जीएसटी का पालन कर रहे हैं और न ही वाणिज्य कर व आयकर विभाग को इसकी खबर है,मजे की बात तो यह है कि कुछ फर्माे द्वारा जीएसटी का पंजीयन कराकर बिलों में अंकित कर लिया और कुछ दिन जीएसटी चालू रखने के बाद कर चोरी की नीयत से जीएसटी कैंसिल करवा लिया।
*बंद जीएसटी में बिना खरीदी हो रही बिक्री*
जिले के सुदूर ग्राम पंचायतों से लेकर जनपद व जिला मुख्यालय तक सैकड़ों ऐसे प्रतिष्ठान संचालित हैं,जिनके द्वारा सीमेंट,रेत,गिट्टी के अलावा भवन निर्माण व अन्य कार्यालयीन उपयोगी सामग्री कहीं से खरीदी नहीं गई है, लेकिन उनकी बिक्री के आंकड़े लाखों के हैं,इनके द्वारा पंचायतों में बिल लगाकर प्रतिष्ठान या फिर संचालकों के व्यक्तिगत खातों में भुगतान लिये जा रहे हैं,हद तो इस बात की है कि केन्द्र सरकार द्वारा पूरे देश में लागू की गई जीएसटी का पालन तक नहीं हो रहा है।अनूपपुर जनपद की ग्राम पंचायत में वेण्डरों द्वारा जीएसटी नंबर का रजिस्ट्रेशन कराकर कुछ दिनों चालू रखने के बाद बंद कर जमकर पंचायतों में बिल लगाये गये हैं।
*_बिना दुकान कागजों में संचालित कई प्रतिष्ठान_*
अनूपपुर जनपद की पंचायतों में लगाये जा रहे विभिन्न बिलों और प्रतिष्ठानों का लेखा-जोखा,आयकर व वाणिज्य विभाग में नहीं है,30 से 40 फीसदी प्रतिष्ठानों का पंजीयन श्रम कार्यालय तक से नहीं कराया गया है और प्रतिष्ठान कहीं घरों के पते पर तो कहीं काल्पनिक पतों पर कागजों में ही संचालित हो रही हैं,वाणिज्य और आयकर सहित श्रम कार्यालय यदि पंचायतों में संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों की पड़ताल करे तो सैकड़ों फर्जी फर्म संचालक सामने आ सकते हैं,वहीं शासन को भी जुर्माने के रूप में लाखों का राजस्व मिल सकता है।
*_साल भर से बंद जीएसटी फिर भी लग रहे बिल_*
अनूपपुर जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में केवट ब्रदर्स नामक फर्म जिसके बिल पर सोहीबेलहा का पता अंकित है,के फॉर्म संचालक द्वारा लगातार बिल लगाकर भुगतान लिया गया है,जबकि जीएसटी विभाग की ऑनलाइन साइट के अनुसार फर्म का रजिस्ट्रेशन स्वप्रेरणा के अंतर्गत दिनांक 14/06/2023 को स्वतः ही कैंसिल हो चुका है।मजे की बात तो यह है कि वाणिज्य कर विभाग ने आज तक उक्त फर्म का रजिस्ट्रेशन होने के बाद जांच की जहमत तक नहीं उठाई कि उक्त फर्म का रजिस्ट्रेशन बंद होने के बाद बिल लगाये जा रहे है कि नहीं।सूत्रों की माने तो इसका फायदा उठाते हुए फर्म संचालक ने पंचायतों को जमकर कमीशन पर बिल बांटे हैं,और लगातार जीएसटी रद्दीकरण दिनांक से आज वर्तमान तक उन्हीं बिलों का उपयोग सामग्री के लेनदेन हेतु कर रहा है।
*_सरपंच,सचिव की मिलीभगत से हो रहा भुगतान_*
पंचायत दर्पण से प्राप्त जानकारी के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि केवट ब्रदर्स फर्म संचालक द्वारा जीएसटी बंद होने के बाद भी बदरा जनपद के विभिन्न ग्राम पंचायतों में बिल लगाकर भुगतान प्राप्त करने जैसा भ्रष्टाचार बिना उस पंचायत के सरपंच तथा सचिव के मिलीभगत के असंभव होगा।ऐसा लगता है कि सभी के आपसी सामंजस्य के तहत ही निर्माण सामग्री के नाम पर बिल लगाकर लाखों की राशि आहरित कर ली गई है।
जबकि जीएसटी विभाग के नियमानुसार स्वप्रेरणा स्वतः रद्दीकरण का मतलब है कि कर अधिकारी द्वारा अपनी इक्षा से वस्तु एवं सेवा कर के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया गया है,तथा निर्धारिति जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति नहीं है,और उसका जीएसटीआईंएन निष्क्रिय हो चुका है,जो कि व्यवसाय करने की अनुमति नहीं देता है।
*इनका कहना है*
कैंसल्ड सुओं मोटो का मतलब जीएसटी कैंसिल है,लेकिन यदि इतने लंबे समय से जीएसटी बंद है तो वह लेनदेन नहीं कर सकता है,आप मुझे उक्त फर्म की जानकारी प्रदान कराए।
*विवेक मरावी*
*सहायक आयुक्त,वाणिज्यिक कर विभाग अनूपपुर*



