“एक्साइज कटौती या कॉर्पोरेट राहत? जनता को राहत नहीं, उद्योगपतियों को फायदा—वरुण चटर्जी

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अनूपपुर।पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार द्वारा की गई एक्साइज ड्यूटी में कटौती को लेकर जिला राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। भगवा पार्टी के जिला महामंत्री वरुण चटर्जी ने इस फैसले पर सीधा हमला बोलते हुए इसे “जनता के नाम पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीति” करार दिया है।

चटर्जी ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का ढोल तो पीटा, लेकिन इसका वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि अगर यह निर्णय सच में जनहित में होता, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्पष्ट गिरावट दिखाई देती, जिससे आम आदमी को राहत मिलती।

उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जब आम नागरिक महंगाई की दोहरी मार झेल रहा है, तब राहत के नाम पर ऐसे फैसले केवल दिखावा साबित हो रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनता के साथ विश्वासघात है।”

चटर्जी ने यह भी कहा कि इस निर्णय का राजनीतिक असर गहरा होगा, क्योंकि जनता अब केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले परिणामों से संतुष्ट होती है। यदि राहत का फायदा लोगों तक नहीं पहुंचेगा, तो असंतोष बढ़ना तय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के वास्तविक प्रभाव को सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि इसका लाभ आखिर किसे मिल रहा है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसे फैसलों का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंचे।इस बयान के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल और महंगाई का मुद्दा आने वाले समय में जनता से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है, जिस पर सियासत और भी गरमा सकती है।

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