अमरकंटक/ अनूपपुर जिले की पावन धरती अमरकंटक सहित आसपास की वादियां मां नर्मदा की असीम कृपा से अभिसिंचित हैं और मां नर्मदा की कृपा का ही प्रभाव है कि अमरकंटक की वादियों में संजीवनी बूटी के समान औषधियां व्याप्त हैं। अमरकंटक की पावन धरा पर मां नर्मदा के आशीष से अभिसिंचित अनूपपुर जिले के रहवासी सौभाग्यशाली हैं, जो कि इस पावन धरती पर जन्म लेकर मां नर्मदा की गोद में खेलने और पलने का अवसर प्राप्त हुआ। परम धर्म सांसद शहडोल श्रीधर शर्मा ने बताया कि हम सब का सौभाग्य है, जो हम लोगों को माँ नर्मदा जी का तट मिला, यहां का अन्न जल, यहां साधु संतों की कृपा प्राप्त हो रही है। श्री शर्मा ने बताया कि पुराणों में अमरकंटक को कोट तीर्थ कहा गया है, क्योंकि इसे संतों द्वारा दूसरा “हिमालय” कहकर भी संबोधित किया जाता है, इसलिए इसे संतों का भजन स्थल भी कहा गया है। वैसे भी देखा जाए, तो वास्तव में यह अमरकंटक की संतों की भूमि कहा गया है और इसलिए भी कहा गया है कि यहां “शक्ति” उपासना के लिए आदि गुरु शंकराचार्य जी ने शिव आदेश से यहां अमरकंटक आकर के ही माँ नर्मदा की उपासना उनके द्वारा की गई थी और संतों के द्वारा ऐसा भी कहा गया है, कि जब तक कोई भी साधक या तपस्वी इस तट पर (अमरकंटक) माँ नर्मदा की तपस्या नहीं किया, तब तक उनकी तपस्या पूर्ण नहीं कहलाती।
“शिव प्रिय मैकल सैल सुता सी, सकल सिद्ध सुख सम्मति राशी”
इस पृथ्वी में बाबा शिव का सबसे प्रिय स्थान अमरकंटक है, जिसका वर्णन रामायण में भी उल्लेखित गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा किया गया है। माँ नर्मदा शिव पुत्री हैं और देवियों में मात्र यही कुमारी हैं और इस कलयुग में संसार को अकेले मात्र अकेले संभाली हुई हैं। मां नर्मदा की कृपा से समूची धरती सुशोभित हो रही है।
मां नर्मदा की कृपा से अभिसिंचित है अनुपपुर के रहवासी_श्रीधर शर्मा
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