जामा मस्जिद पेंड्रा में अलविदा जुमा की नमाज की गई अदा
देश में अमन चैन शुकून आपसी भाईचारे के लिए मांगी गई दुआएं, रोजेदारों का उमड़ा सैलाब, आख़िरी जुम्मे पर रोजेदारों ने अदा की अलविदा जुमा की नमाज़
जावेद खान
पेंड्रा/ ईद के त्यौहार के आगमन की खुशी रोजेदारों के चमकते चेहरे बयां कर रहे हैं और रमजान महीने के आते ही रोजेदारों में बेहद उत्साह व्याप्त है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी रमजान के महीने में कठिन एहतियात बरतने के साथ रोजा रख कर अल्लाह की इबादत करते हैं और एक महीने की कठिन इबादत के बाद ईद के चांद का दीदार कर मुसलमान भाई ईद का त्यौहार मनाते हैं। रमजान माह के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमा कहा जाता है। रमजान महीने के इस जुमे का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है। रमजान माह में पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते हैं और उनके लिए अलविदा जुमा का दिन बेहद ख़ास माना जाता है। इस ख़ास अवसर पर पेण्ड्रा की जामा मस्जिद में भी अलविदा जुमा की नमाज तय समय हुई, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। जामा मस्जिद के इमाम ने नमाज पढ़ाई, और नमाज के बाद दुआ मांगी गई। दुआ, जो बन्दे अल्लाह से करते है, आज की दुआ बहुत ख़ास थी। इमाम साहब ने देश में अमन, शांति भाईचारे के लिए दुआ मांगी। इमाम साहब ने उपस्थित रोजेदारों को अवगत कराया कि 1947 में 15 अगस्त को लंबे संघर्ष के बाद जब हमने अपनी सैकड़ों साल लंबी ग़ुलामी से आज़ादी पाई थी, तब उस रोज़ रमज़ान का सत्ताईसवां रोज़ा और आखिरी शुक्रवार था। ऐसे में रमज़ान, जुमातुलविदा और ईद केवल इस्लामी नहीं, बल्कि हमारी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता का उत्सव भी है।



