आखिर 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरे गौशाला निर्माण कार्य में संबंधित विभागीय अधिकारियों ने क्यों नहीं दिखाई दिलचस्पी?_
_अधूरे गौशाला निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार पर कहीं जिम्मेदारों की मौन सहमति तो नहीं ?_
_दूर संचार के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा दी जाती हैं भ्रामक जानकारियां_
*सुशील पाठक*
रीवा/ विंध्य की गलियों में प्रचलित कहावत है कि “जाके पांव न फटी बेवाई, वो क्या जाने पीर पराई”
यह पंक्ति ग्राम पंचायत लूक में पांच वर्ष पूर्व से बन रहे गौशालाओं की ओर इंगित करती है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को किसी किसान के मेहनत का एहसास होगा? कैसे पता चलेगा कि एक गरीब किसान अन्न को उगाने मे कितनी कड़ी धूप और ठंडी को सहनकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है? क्या किसानों के द्वारा उगाया हुआ अन्न अधिकारियों को खाने के लिए नहीं जाता है?
सरकार समय – समय पर किसानों के दर्द को महसूस कर संभवतः गौशालाओं का निर्माण कर आवारा पशुओं से राहत दिलाने का प्रयास करते हुए गौवंश को सुरक्षित करने का भी प्रयास कर रही है, लेकिन क्षेत्रीय जिम्मेदारों की लापरवाही और आर्थिक लाभ की स्वार्थपरता ने सरकार के प्रयासों की धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
मामला ग्राम पंचायत लूक में पांच वर्ष पूर्व से बन रहे गौशालाओं से संबंधित है, जहां एक ओर मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा गायों के उत्थान व हितों को ध्यान में रखते हुए आम जनता से वसूले गए टैक्स की राशि से गौशाला निर्माण के लिए समूचे प्रदेश में बड़ी राशियां प्रदान की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा गौशालाओं के प्रति पूरे तन्मयता से लापरवाही बरतने में कोई कमी नहीं की जा रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जनपद पंचायत जवा अंतर्गत ग्राम पंचायत लूक में पांच वर्ष से गौशालाओं का निर्माण कार्य जारी है, किंतु आज दिनांक तक कार्य पूरा नहीं किया जा सका, क्योंकि कई महीनों से कार्य बंद पड़ा है। मौके पर उपस्थित समाजसेवी उमाकांत द्विवेदी ने पुनः जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब रोपा लगाने का समय आ गया और गौशाला निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है, तो इन आवारा पशुओं से खेती को कैसे बचाया जा सकेगा?जिम्मेदार अधिकारियों से जब कभी फोन पर बात की जाती है तो उनके द्वारा आजकल कहकर गुमराह कर दिया जाता है। उन्होंने आक्रोशित होकर कहा कि अगर प्रशासन शीघ्र ही अधूरे पड़े गौशालाओं को पूरा कर इन लापरवाह क्षेत्रीय जिम्मेदारों पर उचित कार्यवाही नहीं करती है, तो रीवा कलेक्टर को आवेदन देकर मौके पर आमरण अनशन किया जाएगा।



