*अवैध उर्वरक कारोबार पर लगेगी लगाम, मध्यप्रदेश में लागू हुई ‘सूचना दाता प्रोत्साहन योजना’*

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 _गोपनीय सूचना पर मिलेगा 1000 रुपए का पुरस्कार_

अनूपपुर/ मध्यप्रदेश शासन द्वारा राज्य में उर्वरकों की अवैध बिक्री, अनधिकृत भंडारण, कालाबाजारी, नकली एवं मिलावटी उर्वरकों के निर्माण तथा अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से “सूचना दाता प्रोत्साहन योजना (Informer Incentive Scheme)” लागू की गई है। यह योजना 20 मई 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक पूरे प्रदेश में प्रभावी रहेगी।

योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करते हुए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा कालाबाजारी एवं नकली उर्वरकों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना है। शासन की मंशा है कि आम नागरिकों और किसानों की सक्रिय भागीदारी से इन अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।योजना के अंतर्गत कोई भी नागरिक, किसान अथवा व्यापारी उर्वरकों से संबंधित अवैध गतिविधियों की गोपनीय सूचना दे सकता है। इनमें बिना लाइसेंस उर्वरक विक्रय, निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री (कालाबाजारी), नकली एवं मिलावटी उर्वरकों का निर्माण एवं वितरण, बिना लाइसेंस उर्वरक निर्माण, अनुदानित उर्वरकों जैसे यूरिया का औद्योगिक उपयोग तथा अनधिकृत परिवहन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

_पहचान गोपनीय_

सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। किसी भी स्तर पर उसकी अनुमति के बिना पहचान उजागर नहीं की जाएगी। सूचना देने के लिए कार्यालयीन दिवसों में प्रातः 10 बजे से शाम 6 बजे तक सीएम किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर संपर्क किया जा सकता है।

सूचना में संबंधित स्थान, समय, गतिविधि का विवरण, संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था का नाम एवं पता तथा उपलब्ध साक्ष्य जैसे फोटो, वीडियो अथवा दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। साथ ही सूचना दाता को प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा बैंक शाखा की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

प्राप्त सूचना के आधार पर कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल कार्रवाई करेगा, जिसमें संबंधित क्षेत्र के उर्वरक निरीक्षक को शामिल करना अनिवार्य होगा। जांच में सूचना सही पाए जाने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सफल कार्रवाई, जब्ती अथवा दोष सिद्ध होने की स्थिति में सूचना दाता को प्रति सूचना पर 1000 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार यह योजना न केवल उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने में सहायक होगी, बल्कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। शासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध उर्वरक गतिविधि की जानकारी तत्काल साझा कर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें।

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