सोशल मीडिया के माध्यम से उठाया नागरिकता प्रमाण का सवाल, वैधानिक रिकॉर्ड स्पष्ट करने की मांग
अनूपपुर। भारतीय गणवर्ता भगवा पार्टी के जिला महामंत्री वरुण चटर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से नागरिकता के वैधानिक प्रमाण को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि पासपोर्ट को भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता, तो आम नागरिक के लिए यह जानना आवश्यक है कि आखिर ऐसा कौन-सा वैधानिक दस्तावेज या सरकारी रिकॉर्ड है, जो उसकी भारतीय नागरिकता को सिद्ध करता है।
वरुण चटर्जी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में किसी संकट की स्थिति में यह कहे कि उसके पास भारतीय पासपोर्ट है, और वहां यह कहा जाए कि स्वयं भारत में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता, तो ऐसी स्थिति में नागरिक अपनी भारतीय नागरिकता किस आधार पर सिद्ध करेगा।उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि “यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो आखिर वह कौन-सा वैधानिक प्रमाण या सरकारी रिकॉर्ड है, जिससे कोई व्यक्ति यह साबित कर सके कि वह भारत का नागरिक है?”
उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। आम नागरिक को यह जानकारी होना आवश्यक है कि भारतीय कानून के अनुसार नागरिकता सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से वैधानिक आधार और दस्तावेज मान्य हैं।
वरुण चटर्जी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि नागरिकों के मन में मौजूद इस महत्वपूर्ण प्रश्न का स्पष्ट उत्तर प्राप्त करना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।



