जनजातीय विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अवैध धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध- हज़ारों छात्रों ने ली राहत की साँस*

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*अनूपपुर जिला प्रशासन का ऐतिहासिक निर्णय*

अनूपपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए 26 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक राहत लेकर आया। पुष्पराजगढ़ के अनुविभागीय दंडाधिकारी वसीम अहमद भट्ट द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत एक प्रतिषेधात्मक आदेश पारित किया गया है, जिसके तहत विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार तथा उसके 100 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, सभा या नारेबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, मुख्य द्वार को बलपूर्वक बंद करने अथवा अवरुद्ध करने पर भी रोक लगाई गई है, ताकि विद्यार्थियों, कर्मचारियों, अधिकारियों एवं आमजन का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित रहे। विवि के पीएचडी शोध छात्रद्वय रोहित श्रीवास एवं आयन ब्रह्मा द्वारा 19 जून 2026 को कुलसचिव को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें परिसर की शांति-व्यवस्था एवं छात्रों के भविष्य की रक्षा हेतु तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई थी। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष, मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ज़िलाधीश हर्षल पंचोली तथा पुलिस अधीक्षक महोदय को भी प्रेषित की गई थी। अनूपपुर प्रशासन द्वारा त्वरित एवं संवेदनशील कार्यवाही ने विश्वविद्यालय के हज़ारों छात्र-छात्राओं में हर्ष की लहर दौड़ा दी है।

*मुख्य द्वार बंद करने वाले असमाजिक तत्व जायेंगे जेल*

रोहित श्रीवास एवं आयन ब्रह्मा ने बताया की विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय का यह संरक्षित परिसर एक गंभीर समस्या से जूझ रहा था। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि कतिपय असामाजिक तत्वों द्वारा जब-तब केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बलपूर्वक बंद कर दिया जाता था, जिससे न केवल विद्यार्थियों का आवागमन बाधित होता था, अपितु एम्बुलेंस सहित आपातकालीन एवं स्वास्थ्य सेवाएँ भी अवरुद्ध हो जाती थीं। परिसर में निवासरत सैकड़ों परिवारों एवं हज़ारों छात्रों का जनजीवन तथा नागरिक सुरक्षा बार-बार संकट में पड़ती रही। 29 मई 2026 को भी इसी प्रकार विश्वविद्यालय प्रशासन के 26 मई 2026 के स्पष्ट प्रतिबंधात्मक आदेश की खुली अवहेलना करते हुए मुख्य द्वार पर बलपूर्वक ताला लगाकर अवैध धरना-प्रदर्शन किया गया था। स्मरणीय है कि जनजातीय विश्वविद्यालय भारत के माननीय राष्ट्रपति के संरक्षण में स्थापित, संसद के अधिनियम द्वारा निर्मित एक संरक्षित केंद्रीय परिक्षेत्र है। ऐसे संरक्षित परिसर में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का धरना-प्रदर्शन अथवा मुख्य द्वार को अवरुद्ध करना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। प्रशासन के इस आदेश ने इस विधिविरुद्ध परंपरा पर विराम लगाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

*विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर आघात से हजारों छात्रों का भविष्य संकट में*

कुछ षड्यंत्रकारी प्रोफेसरों द्वारा प्रायोजित बनावटी एवं बार-बार झूठी जातिगत इन अवैध आंदोलनों ने विश्वविद्यालय की गौरवशाली प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुँचाई है। जातिवाद एवं क्षेत्रवाद का रंग देकर तथा विभिन्न फर्जी आरोपों की आड़ में किए गए इन प्रदर्शनों ने संस्था की छवि को इस सीमा तक प्रभावित किया है कि यहाँ से उत्तीर्ण होने वाले लाखों पूर्व छात्रों तथा अध्ययनरत हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, यहाँ के छात्रों का प्लेसमेंट शून्य हो गया हाउ। शैक्षणिक संस्थान की साख ही उसके विद्यार्थियों की सबसे बड़ी पूँजी होती है, और उस साख का क्षरण समस्त छात्र समुदाय की सामूहिक क्षति है। यही कारण है कि प्रशासन का यह निर्णय छात्रों के लिए केवल व्यवस्था का प्रश्न नहीं, अपितु उनके भविष्य की रक्षा का प्रश्न है।

*29 मई की फर्जी एवं लाखों में प्रायोजित आन्दोलन में सम्मिलित प्रोफेसरों की कॉल डिटेल्स की निष्पक्ष जाँच की माँग*

रोहित श्रीवास एवं आयन ब्रह्मा ने माँग की है की 29 मई को फर्जी जातिवाद के आरोप से समाज में जहर घोला गया, गंभीर तथ्यों की सक्षम प्राधिकारी द्वारा तत्काल, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अवैध आंदोलनों के कथित वित्तपोषण, परिसर में मादक पदार्थों के कथित कारोबार, गोपनीय दस्तावेज़ों के कथित अनधिकृत अभिगम तथा संबंधित कॉल डिटेल्स एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य प्रकाश में आ सकें और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को मिथ्या आरोपों से प्रताड़ित न किया जा सके।

*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा ज़िलाधीश हर्षल पंचोली को छात्रों का आभार*

रोहित श्रीवास एवं आयन ब्रह्मा ने बताया की जिला प्रशासन का प्रस्तुत आदेश माननीय उच्चतम न्यायालय तथा गृह मंत्रालय भारत सरकार के अधिसूचना के स्थापित विधिक सिद्धांतों के अनुरूप है। जनजातीय विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं की ओर से हम पुष्पराजगढ़ के अनुविभागीय दंडाधिकारी वसीम अहमद भट्ट, ज़िलाधीश हर्षल पंचोली, पुलिस अधीक्षक महोदय, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष तथा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। इस त्वरित एवं न्यायसंगत कार्यवाही ने छात्रों के मन में प्रशासन एवं विधि-व्यवस्था के प्रति विश्वास को सुदृढ़ किया है। छात्रों ने सक्षम प्राधिकारी 29 मई के प्रकरण से जुड़े समस्त गंभीर बिंदुओं की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जाँच सुनिश्चित करने का माँग रखा है तथा भविष्य में आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रचलित विधि के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संगत धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्यवाही तथा तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने की माँग की है, ताकि हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे और संस्था की गौरवशाली परंपरा पुनर्स्थापित हो सके।

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