जब हम कथा को सुनते हैं, तो हमारे भीतर भी वही शुद्धता और समर्पण जाग्रत होता है- श्री रमाशंकर दास जी वेदांती महाराज

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अनूपपुर अयोध्या के प्रतिष्ठित संत, श्री राम वल्लभा कुंज जानकी घाट अयोध्या के पीठाधीश्वर  रामदास वेदांती महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के सत्र में रुक्मिणी प्रसंग पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने रुक्मिणी के प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण के गहरे अर्थों को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया और कहा कि यह प्रसंग भगवान कृष्ण के साथ उनके अनन्य संबंधों का प्रतीक है।

सुनील शुक्ला एवं पत्रकार राजकुमार शुक्ला, जितेंद्र शुक्ला, ओम शुक्ला, बंधुओं के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में वेदांती महाराज ने कहा, “रुक्मिणी का हृदय केवल प्रेम का ही नहीं, बल्कि शुद्ध भक्ति का भी प्रतिबिंब है। जब हम इस कथा को सुनते हैं, तो हमारे भीतर भी वही शुद्धता और समर्पण जाग्रत होता है।” उन्होंने यह भी बताया कि इस कथा का श्रवण करने से मनुष्य के भीतर के अंधकार को दूर किया जा सकता है और जीवन में शांति स्थापित होती है।

भागवत कथा सप्ताह का आयोजन शुक्ला बांधो द्वारा निज निवास अनूपपुर में श्रोताओं को भागवत पुराण की महिमा, नैमिषारण्य की कथा और कलियुग के उपायों से परिचित कराया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय भक्तों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और कथा के अंत में भजन‑कीर्तन के साथ समापन किया गया।

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