जगतगुरु शंकराचार्य को स्नान से रोकना भाजपा का हिंदू विरोधी चरित्र : कांग्रेस*

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*मुकेश राय*

एम सी बी/ भारतीय संस्कृति और परंपराओं में धार्मिक आस्थाओं का विशेष स्थान है। महान संत जगतगुरु शंकराचार्य का नाम भारतीय धार्मिक परंपरा में उच्च स्थान रखता है। उनका जीवन और दर्शन न केवल अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति को एकसूत्र में बांधने का भी कार्य करते हैं। हाल ही में, मौनी अमावस्या के दिन जब शंकराचार्य को स्नान जैसे पवित्र कृत्य से रोका गया, तो यह घटना न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों के खिलाफ है। मौनी अमावस्या पर स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल शारीरिक शुद्धता का प्रतीक है, बल्कि आत्मिक शुद्धता का भी। यहाँ पर यह सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? राजनीतिक कारणों से धार्मिक आयोजनों में रोक-टोक का ये पहला मामला नहीं है। इतिहास गवाह है कि मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में भी सिखों और हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी यदि ऐसी घटनाएँ हो रही हैं, तो यह किसी गंभीर मुद्दे की ओर इशारा करता है। भाजपा सरकार की ये कार्रवाइयाँ उनके हिंदू विरोधी चरित्र को उजागर करती हैं। यह कहा जा सकता है कि उनका प्रयास धार्मिक सहिष्णुता को खत्म करने और एक विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाने का है। शंकराचार्य जैसे संतों का सम्मान सभी धर्मों के लोगों के लिए आवश्यक है, और इसकी उपेक्षा करना एक खतरनाक प्रवृत्ति है। इस घटना ने हिंदू समुदाय में असंतोष पैदा किया है। सामाजिक स्थिरता और धार्मिक प्राथमिकताओं का अपमान स्वीकार्य नहीं है। मौनी अमावस्या जैसे पवित्र दिन को इस तरह से विवाद में लाना न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है, बल्कि सिर पर आसीन किसी राजनीतिक दल के विचारधारा के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करना भी प्रतीत होता है। हिंदू संस्कृति का व्यापक दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि हमें सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। भाजपा की ये कार्रवाइयाँ उनके सच्चे और प्रगतिशील हिंदू विचारधारा के प्रति एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करती हैं। क्या हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता की भक्ति नहीं है? जगतगुरु शंकराचार्य को स्नान से रोकना भाजपा के हिंदू विरोधी चरित्र को उजागर करता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने धार्मिक आस्था और परंपराओं को संरक्षित कर पाएंगे। यह केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा के संरक्षण का प्रश्न है।

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